Monday, April 28, 2008

सृष्टि चक्र

असंख्य बिन्दुओं का संग्रह
संग्रह का गमन और पड़ाव
क्षण -क्षण ।

बटोरता अनुभवों के कण
व्यक्तित्व का निर्माण करता
गमन करता
बिन्दुओं का वह संग्रह
क्षण क्षण ।

उसका गमन और पड़ाव
गति और स्थिति उसकी
दोनों एक ही क्षण
विलक्षण ।

ऐसे ही असंख्य विलक्षण
और विश्व गया है बन
बिन्दुओं पर बैठा
इस विश्व को देखता
हमारा मन ।

मन जिसने पूर्णत्व को
इश्वरत्व को
कर दिया है कण कण ।

1 comments:

mahendra mishra said...

bahut sundar badhaai .